विभिन्न क्षेत्रों के जनक कौन कौन है और उन्हें जनक क्यों कहा जाता हैं?
हमारे दुनिया अजीबोगरीब वैज्ञानिक चमत्कार और अविष्कार से भरा हुआ है। ये जो नए नए अविष्कार और चमत्कार करते है उन्हें उस क्षेत्र के अविस्मरणीय योगदान के लिए उंस क्षेत्र के महान या जनक जैसे सम्मान से सम्मान दिया जाता है। तो चलिए देखते हैं आज उन्ही में से विभिन्न क्षेत्रों के जनक कौन कौन है और उन्हें जनक क्यों कहा जाता हैं?
विभिन्न क्षेत्रों के जनक की सूची विस्तृत जानकारी के साथ
विभिन्न क्षेत्रों के जनक में सबसे पहले बात करते है महात्मा गांधी से तो आइए शुरू करते हैं, विभिन्न क्षेत्रों के जनक कौन कौन है और उन्हें जनक क्यों कहा जाता हैं?
1. राष्ट्रपिता – महात्मा गांधी
सुभाष चन्द्र बोस ने 4 जून 1944 को सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को देश का ‘पिता’ कहकर संबोधित किया था इसके बाद 6 जुलाई 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने एक बार फिर अ रेडियो सिंगापुर से एक संदेश प्रसारित कर गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया। बाद में भारत सरकार ने भी इस नाम को मान्यता दे दी और महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता बन गए।
2. आधुनिक भारत के जनक – राजा राम मोहन राय
राज राम मोहन राय को विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक भारत के जनक इसलिए कहा जाता हैं, क्योंकि उन्होंने भारत की आधुनिकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जैसे उन्होंने ब्राह्म समाज के अन्तर्गत कई धार्मिक रूढियों को बंद करा दिया जैसे- सती प्रथा, बाल विवाह, जाति तंत्र और अन्य सामाजिक कुरूतियां। वेदांता कॉलेज खोले, अंग्रेजी भाषा का समर्थन किया। ऐसे ही बहुत से काम किये जिसके कारण उनको आधुनिक भारत का जनक कहा जाने लगा।
3. भाषाई लोकतंत्र के जनक – पोट्टी श्रीरामुलु
स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी, आंध्र क्षेत्र के लिए अपने आत्म – बलिदान के लिए श्रीरामुलु आंध्र प्रदेश के लिए अलग राज्य के समर्थन में 56 दिनों तक भूख हड़ताल करने के लिए वह प्रसिद्ध हुए। इस प्रक्रिया में उनकी मृत्यु हो गई । उनकी मृत्यु ने सार्वजनिक दंगे भड़काए और भारतीय प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आंध्र राज्य बनाने के लिए नव मुक्त राष्ट्र के इरादे की घोषणा की।
श्रीरामुलु की मृत्यु के तीन दिन बाद, उन्होंने तमिल नाडु प्रेसीडेंसी के प्रमुख तमिल भाषी राज्य से एक अलग तेलुगु भाषी राज्य के गठन के लिए अपने जीवन का योगदान दिया। उनके संघर्षों के लिए आंध्रप्रदेश ” नामक अलग तेलुगु भाषी राज्य का गठन किया और इसी कारण उन्हें भाषाई लोकतंत्र के जनक कहे जाने लगे।
4. संविधान के पिता – भीमराव अंबेडकर
अम्बेडकर एक विपुल छात्र थे, उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स दोनों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की, कानून, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में अपने शोध के लिए एक विद्वान के रूप में ख्याति प्राप्त की। भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में उन्होंने संविधान का निमार्ण किया। जिनके कारण उनको संविधान का पिता कहा जाता हैं।
5. आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक – महादेव गोविंद रानाडे
महादेव गोविंद रानाडे ने अर्थशास्त्र से संबंधित कई सुधार किए। महादेव गोविंद ने 1899 में भारतीय अर्थशास्त्र पर निबंध लिखे। इन सभी कारणों के कारण उन्हें आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक कहते हैं।
6. आधुनिक आर्थिक सुधारों के जनक – डॉ. मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह भारत गणराज्य के 13 वें प्रधानमन्त्री थे। साथ ही साथ वे एक अर्थशास्त्री भी हैं। पी वी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में वित्त मन्त्री के रूप में किए गए आर्थिक सुधारों के लिए भी श्रेय दिया जाता है। उनकी पुस्तक इंडियाज़ एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ भारत की अन्तर्मुखी व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है।
डॉ॰ सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी ख्याति अर्जित की। वे पंजाब विश्वविद्यालय और बाद में प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे। इसी बीच वे संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सलाहकार भी रहे और जेनेवा में साउथ कमीशन में सचिव भी रहे। 1971 में डॉ॰ सिंह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये। इसके तुरन्त बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया।
इसके बाद के वर्षों में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। भारत के आर्थिक इतिहास में हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब डॉ० सिंह 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मन्त्री रहे। उन्हें भारत के आर्थिक सुधारों का प्रणेता माना गया है। इन वर्षों में आर्थिक क्षेत्र में किये उनके सुधारो की वजह से उन्हें आधुनिक आर्थिक सुधार के जनक कहे जाते हैं।
7. परमाणु कार्यक्रम के जनक – होमी जे. भाभा
होमी जहांगीर भाभा भारत के एक प्रमुख वैज्ञानिक और स्वप्नदृष्टा थे जिन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होने कुछ वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान आरम्भ किया। उन्होंने नाभिकीय विज्ञान में तब कार्य आरम्भ किया जब अविछिन्न शृंखला अभिक्रिया का ज्ञान नहीं के बराबर था और नाभिकीय उर्जा से विद्युत उत्पादन की कल्पना को कोई मानने को तैयार नहीं था। उन्हें आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम भी कहा जाता है।
भारत को परमाणु शक्ति बनाने के मिशन में प्रथम कदम के तौर पर उन्होंने 1945 में मूलभूत विज्ञान में उत्कृष्टता के केंद्र टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ( टीआइएफआर ) की स्थापना की। 1947 में भारत सरकार द्वारा गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष नियुक्त हुए। 1953 में जेनेवा में अनुष्ठित विश्व परमाणुविक वैज्ञानिकों के महासम्मेलन में उन्होंने सभापतित्व किया। परमाणु ऊर्जा के इन क्षेत्रों किये उनके कार्यो के वजह से उन्हें भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक कहते हैं।
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8. अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक – विक्रम साराभाई
विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। डॉ॰ विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। अंतरिक्ष क्षेत्र में किये गए उनके इन प्रयासों की वजह से उन्हें अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहते हैं।
9. मिसाइल कार्यक्रम के जनक – डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम, जो मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति नाम से भी जाने जाते हैं, वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में विख्यात थे। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो ) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे।
इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में ‘ मिसाइल मैन ‘ के रूप में जाना जाता है। इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान – द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। परमाणु क्षेत्र में किये गए इनके अद्वितीय कार्यो के वजह से इन्हें मिसाइल कार्यक्रम के जनक कहा जाता हैं।
10. हास्य पुस्तकों के जनक – अनंत पाई
अनंत पई जो अंकल पई के नाम से लोकप्रिय थे, भारतीय शिक्षाशास्त्री और कॉमिक्स, ख़ासकर अमर चित्र कथा श्रृंखला, के रचयिता थे। इंडिया बुक हाउज़ प्रकाशकों के साथ 1967 में शुरू की गई इस कॉमिक्स शृंखला के ज़रिए बच्चों को परंपरागत भारतीय लोक कथाएँ, पौराणिक कहानियाँ और ऐतिहासिक पात्रों की जीवनियाँ बताई गईं। 1980 में टिंकल नामक बच्चों के लिए पत्रिका उन्होंने रंग रेखा फ़ीचर्स, भारत का पहला कॉमिक और कार्टून सिंडिकेट, के नीचे शुरू की। 1998 तक यह सिंडिकेट चला, जिसके वो आख़िर तक निदेशक रहे। इनके किये गए इन कार्यो के वजह से इन्हें हास्य पुस्तकों का जनक कहा जाता हैं।
11. भूगोल के जनक – जेम्स रेनेल
मेजर जेम्स रेनेल, एक अंग्रेजी भूगोलवेत्ता, इतिहासकार और समुद्र विज्ञान के अग्रणी थे। रेनेल ने एक इंच से पांच मील की दूरी पर बंगाल के कुछ पहले सटीक मानचित्रों के साथ – साथ भारत की सटीक रूपरेखा तैयार की और बंगाल के सर्वेयर जनरल के रूप में कार्य किया। 1830 में वह लंदन में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी के संस्थापकों में से एक थे।
रेनेल का पहला और सबसे प्रभावशाली कार्य था बंगाल एटलस (1779) जो भारत के पहले विस्तृत नक्शे के बाद किया गया, की भौगोलिक प्रणाली हेरोडोटस (1800), पश्चिमी का तुलनात्मक भूगोल एशिया (1831), और उत्तरी अफ्रीका के भूगोल पर महत्वपूर्ण अध्ययन – मुंगो पार्क और हॉर्नमैन की यात्रा के परिचय में स्पष्ट। रेनेल ने मेमोयर ऑफ ए मैप ऑफ हिंदोस्तान (1788) नामक पुस्तक प्रकाशित की और सर जोसेफ बैंक्स को समर्पित की। भूगोल के क्षेत्र में उनके इन उपलब्धियों के कारण उन्हें भूगोल का जनक कहा जाता हैं।
12.सिनेमा के पिता – दादासाहेब फाल्के
दादासाहब फालके भारतीय निर्माता – दिगदर्शक – लेखक धुंडिराज गोविन्द फालके उपाख्य दादासाहब वह महापुरुष हैं जिन्हें भारतीय फिल्म उद्योग का पितामह कहा जाता है। दादा साहब फालके, सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट से प्रशिक्षित सृजनशील कलाकार थे। वह मंच के अनुभवी अभिनेता थे, शौकिया जादूगर थे।
फरवरी 1912 में, फिल्म प्रोडक्शन में एक क्रैश – कोर्स करने के लिए वह इंग्लैण्ड गए और एक सप्ताह तक सेसिल हेपवर्थ के अधीन काम सीखा। कैबाउर्न ने विलियमसन कैमरा, एक फिल्म परफोरेटर, प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग मशीन जैसे यंत्रों तथा कच्चा माल का चुनाव करने में मदद की। इन्होंने ‘राजा हरिशचंद्र’ बनायी।
चूंकि उस दौर में उनके सामने कोई और मानक नहीं थे, अतः सब कामचलाऊ व्यवस्था उन्हें स्वयं करनी पड़ी। अभिनय करना सिखाना पड़ा, दृश्य लिखने पड़े, फोटोग्राफी करनी पड़ी और फिल्म प्रोजेक्शन के काम भी करने पड़े । महिला कलाकार उपलब्ध न होने के कारण उनकी सभी नायिकाएं पुरुष कलाकार थे (वेश्या चरित्र को छोड़कर)। होटल का एक पुरुष रसोइया सालुंके ने भारतीय फिल्म की पहली नायिका की भूमिका की।
21 अप्रैल 1913 को ओलम्पिया सिनेमा हॉल में यह रिलीज की गई। पश्चिमी फिल्म के नकचढ़े दर्शकों ने ही नहीं, बल्कि प्रेस ने भी इसकी उपेक्षा की। लेकिन फालके जानते थे कि वे आम जनता के लिए अपनी फिल्म बना रहे हैं, अतः यह फिल्म जबरदस्त हिट रही। इनकी इन उपलब्धि से फिल्म जगत की नींव डली और इसी लिए दादा साहेब फाल्के को सिनेमा जगत का पिता कहा जाता है।
13. किसान आंदोलन के जनक – एन. जी. रंगा
एन जी रंगा भारतीय स्वतंत्रता सेनानी गोगिनेनी रंगा नायकुलु, जिसे एनजी रंगा भी कहा जाता है, एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, संसद और किसान नेता थे। वह किसान दर्शन का एक प्रवक्ता था, और भारतीय किसान आंदोलन के पिता माना जाता है। रंगा अंतर्राष्ट्रीय कृषि संघ के अंतर्राष्ट्रीय संघ के संस्थापकों में से एक था। उन्होंने 1946 में खाद्य और कृषि संगठन में 1948 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठनज़ 1952 में राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन, 1954 में अंतर्राष्ट्रीय किसान संघ और एशियाई में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
14. पैलियोबोटनी के जनक – बीरबल साहनी
बीरबल साहनी को भारतीय पुरा – वनस्पति विज्ञान यानी “इंडियन पैलियोबॉटनी का जनक” माना जाता है। प्रो. साहनी ने भारत में पौधों की उत्पत्ति तथा पौधों के जीवाश्म पर महत्त्वपूर्ण शोध किए। पौधों के जीवाश्म पर उनके शोध मुख्य रूप से जीव विज्ञान की विभिन्न शाखाओं पर आधारित थे। भारत के प्रथम जुरासिक वैज्ञानिक बीरबल साहनी नवंबर, 1891 – अप्रैल, 1949 अंतरराष्ट्रीय ख्याति के पुरावनस्पति वैज्ञानिक थे।
15. नीली क्रांति के जनक – हीरालाल चौधरी
डॉ. हीरालाल चौधरी एक भारतीय बंगाली मत्स्य वैज्ञानिक थे। वह कार्प के प्रेरित प्रजनन के जनक थे। भारत में नीली क्रांति उनके द्वारा हाइपोफिजेशन के माध्यम से बीज उत्पादन तकनीक के आधार पर विकसित की गई थी। बाद में उन्होंने तालाबों में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए गहन मिश्रित खेती का मार्ग प्रशस्त किया।
भारत में नीली क्रांति जनक “हीरालाल चौधरी और अरुण कृष्णन” को माना जाता है। नीली क्रांति का सम्बंध मछली उत्पादन से है। नीली क्रांति 1960 के दशक के मध्य से लेकर आज तक दुनिया भर में जलीय कृषि उद्योग में तीव्र वृद्धि के समय को संदर्भित करती है। जलीय कृषि उद्योग प्रति वर्ष औसतन नौ प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
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16. हरित क्रांति के जनक – एम एस स्वामीनाथन
एम ॰ एस ॰ स्वामीनाथन भारतीय वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन भारत के आनुवंशिक वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारत की “हरित क्रांति” का जनक माना जाता है। उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकिसित किए। उन्हें विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1972 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
कृषि वैज्ञानिक उच्च उत्पादन वाले गेंहू की प्रजाति का विकास ‘हरित क्रांति’ कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे। इस क्रांति ने भारत को दुनिया में खाद्यान्न की सर्वाधिक कमी वाले देश के कलंक से उबारकर 25 वर्ष से कम समय में आत्मनिर्भर बना दिया था। उस समय से भारत के कृषि पुनर्जागरण ने स्वामीनाथन को ‘कृषि क्रांति आंदोलन’ के वैज्ञानिक नेता के रूप में ख्याति दिलाई। उनके द्वारा सदाबाहर क्रांति की ओर उन्मुख अवलंबनीय कृषि की वकालत ने उन्हें अवलंबनीय खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व नेता का दर्जा दिलाया।
1️7. श्वेत क्रांति के जनक – वर्गीज कुरियन
वर्गीज़ कुरियन 1965 से 1998 तक राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष थे। वे भारतीय “श्वेत क्रांति “के जनक थे, जिससे भारत को विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में उभरने में मदद मिली। 60 के आखिरी दशक में डॉ. कुरियन ने ऑपरेशन फ्लड नाम से एक परियोजना की शुरूआत की।
ऑपरेशन फल्ड या धवल क्रान्तिविश्व के सबसे विशालतम विकास कार्यक्रम के रूप मे प्रसिद्ध है। सन् 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा शुरू की गई योजना ने भारत को विश्व मे दुध का सबसे बढा उत्पादक बना दिया। इस योजना की सफलता के तहत इसे ‘श्वेत क्रन्ति’ का पर्यायवाची दिया गया।
1️8. पशु चिकित्सा विज्ञान के जनक – शालिहोत्रा
शालिहोत्र की पाण्डुलिपि शालिहोत्र ऋषि के पुत्र थे। वे पशुचिकित्सा के जनक माने जाते हैं। उन्होंने शालिहोत्रसंहिता नामक ग्रन्थ की रचना की। उनकी इस क्षेत्र में विशेष योगदान के कारण उन्हें पशु चिकित्सा विज्ञान के जनक कहा जाता हैं। पशु – चिकित्सा विज्ञान में मनुष्येतर जीवों की शरीररचना, शरीरक्रिया, विकृतिविज्ञान, भेषज तथा शल्यकर्म का अध्ययन होता है।
1️9. नागरिक उड्डयन के जनक – जे आर डी टाटा
जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा या जे आर डी टाटा भारत के वायुयान उद्योग और अन्य उद्योगो के अग्रणी थे। वे दशको तक टाटा ग्रुप के निर्देशक रहे और इस्पात, इंजीनीयरींग, होट्ल, वायुयान और अन्य उद्योगो का भारत मे विकास किया।
उन्होंने टाटा एयरलाइंस शुरू की। भारत के लिए महान इंजीनियरिंग कंपनी खोलने के सपने के साथ उन्होंने 1945 में टेल्को की शुरूआत की जो मूलतः इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव के लिए थी। उन्हे वर्ष 1957 मे पद्म विभूषण और 1992 में भारत रत्न से सम्मनित किया गया। इस क्षेत्र में उनकी इस उपलब्धि के कारण उन्हें नागरिक उड्यन के जनक के तौर पे जाना जाता है।
20. वायु सेना के पिता – सुब्रतो मुखर्जी
वायु सेना के पिता सुब्रतो मुखर्जी एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी, भारतीय वायु सेना के पहले भारतीय कमांडर प्रमुख थे। उनका करियर लगभग तीन दशकों तक चला और 1960 में उनके असामयिक निधन तक उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया। उन्हें ” भारतीय वायु सेना का पिता ” कहा जाता है।
️21. सिविल इंजीनियरिंग के जनक – सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया
भारतीय विकास के जनक मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुका में हुआ था। विश्वेश्वरैया भारत के माने हुए सफल इंजीनियर थे। सर मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरय्या 15 सितंबर 1860 – 14 अप्रैल 1962 में भारत के महान अभियन्ता एवं राजनयिक थे। उन्हें सन 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था। भारत में उनका जन्मदिन “अभियन्ता दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
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️22. सर्जरी के जनक – सुश्रुत
6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में पैदा हुए सुश्रुत नाम के एक भारतीय चिकित्सक को व्यापक रूप से सर्जरी का जनक माना जाता है। उन्होंने चिकित्सा और सर्जरी पर दुनिया के शुरुआती कार्यों में पहली बार विस्तार से लिखा। यही कारण है कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने माना है कि सुश्रुत सर्जनी के जनक थे। सुश्रुत शल्यचिकित्सा प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। वे आयुर्वेद के महान ग्रन्थ सुश्रुतसंहिता के प्रणेता हैं।
️23. माइक्रोबायोलॉजी के जनक – एंटोनी फिलिप्स वैन लीउवेनहोएक
एंटोनी फिलिप्स वैन लीउवेनहोएक डच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के स्वर्ण युग में एक डच व्यवसायी और वैज्ञानिक थे। विज्ञान में एक बड़े पैमाने पर आत्म-शिक्षित व्यक्ति, उन्हें आमतौर पर “सूक्ष्म जीव विज्ञान के पिता” के रूप में जाना जाता है, और पहले सूक्ष्मदर्शी और सूक्ष्म जीवविज्ञानी में से एक है। वैन लीउवेनहोक माइक्रोस्कोपी में अपने अग्रणी कार्य और एक वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में सूक्ष्म जीव विज्ञान की स्थापना में उनके योगदान के लिए जाने जाते है।
24. परमाणु भौतिकी के जनक – अर्नेस्ट रदरफोर्ड
रदरफोर्ड प्रसिद्ध रसायनज्ञ तथा भौतिकशास्त्री थे। उन्हें नाभिकीय भौतिकी का जनक माना जाता है। नाभिकीय भौतिकी में योगदान के लिए 1908 में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अर्नेस्ट रदरफोर्ड के परमाणु संरचना के सिद्धांत से पहले पदार्थों में परमाणु की उपस्थिति का पता तो चल सका था, सालों पहले महर्षि कणाद ने यह बता दिया था कि प्रत्येक पदार्थ बहुत छोटे – छोटे कणों से मिलकर बना है। 1808 में ब्रिटेन के भौतिक विज्ञानी जॉन डाल्टन ने अपने प्रयोगों के आधार पर बताया कि पदार्थ जिन अविभाज्य कणों से मिलकर बना है, उन्हें परमाणु कहते हैं।
अर्नेस्ट रदरफोर्ड, जिसे फादर ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स के नाम से जाना जाता है , का जन्म 30 अगस्त, 1871 को हुआ था । रदरफोर्ड ने रेडियोधर्मी आधे जीवन की अवधारणा की खोज की और विभिन्न तत्वों में अल्फा और बीटा विकिरणों को साबित किया और बाद में सबसे महान प्रयोगवादियों में से एक के रूप में दुनिया में उनका नाम आया।
️25. कंप्यूटर विज्ञान के जनक – जॉर्ज बूले और एलन ट्यूरिंग
एलेन मैथिसन ट्यूरिंग एक अंग्रेजी कंप्यूटर वैज्ञानिक, गणितज्ञ, तर्कज्ञ, क्रिप्टैनालिस्ट, दार्शनिक , और सैद्धांतिक जीवविज्ञानी थे। ट्यूरिंग कंप्यूटर विज्ञान के विकास में अत्यधिक प्रभावशाली थे, जो ट्यूरिंग मशीन के साथ एल्गोरिदम और गणना के अवधारणाओं का एक रूप प्रदान करता था, जिसे सामान्य रूप से कंप्यूटर का मॉडल माना जा सकता है। ट्यूरिंग को व्यापक रूप से सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान और कृत्रिम बुद्धि का जनक माना जाता है।
26. वर्गीकरण के जनक – कार्ल लिनियस
कार्ल लीनियस एक स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, चिकित्सक और जीव विज्ञानी थे, जिन्होने द्विपद नामकरण की आधुनिक अवधारणा की नींव रखी थी। इन्हें आधुनिक वर्गिकी (वर्गीकरण) के पिता के रूप में जाना जाता है, साथ ही यह आधुनिक पारिस्थितिकी के प्रणेताओं मे से भी एक हैं।
️17. विकास के जनक – चार्ल्स डार्विन
चार्ल्स डार्विन ने क्रमविकास के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उनका शोध आंशिक रूप से 1831 से 1836 में एचएमएस बीगल पर उनकी समुद्र यात्रा के संग्रहों पर आधारित था। इनमें से कई संग्रह इस संग्रहालय में अभी भी उपस्थित हैं। अल्फ्रेड रसेल वॉलेस के साथ एक संयुक्त प्रकाशन में, उन्होंने अपने वैज्ञानिक सिद्धांत का परिचय दिया कि विकास का यह शाखा पैटर्न एक ऐसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हुआ, जिसे उन्होंने प्राकृतिक वरण या नेचुरल सेलेक्शन कहा। डार्विन महान वैज्ञानिक थे। आज जो हम सजीव चीजें देखते हैं, उनकी उत्पत्ति तथा विविधता को समझने के लिए उनका विकास का सिद्धांत सर्वश्रेष्ठ माध्यम बन चुका है।
️28. आधुनिक ओलंपिक के जनक – पियरे डी कूपर्टिन
पियरे डे कोबेर्टिन एक फ्रांसीसी शिक्षाशास्त्री और इतिहासकार थे, अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के संस्थापक और आधुनिक ओलंपिक खेलों के जनक मानें जाते है। जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी, जिसके कारण उन्हें “आधुनिक ओलंपिक खेलों का जनक” माना जाता है। और उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त है।
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️19. संख्याओं के जनक – पाइथागोरस
पाइथागोरस एक अयोनिओयन ग्रीक गणितज्ञ और दार्शनिक थे और पाईथोगोरियनवाद नामक धार्मिक आन्दोलन के संस्थापक थे। उन्हें अक्सर एक महान गणितज्ञ, रहस्यवादी और वैज्ञानिक के रूप में सम्मान दिया जाता है। हालाँकि कुछ लोग गणित और प्राकृतिक दर्शन में उनके योगदान की संभावनाओं पर सवाल उठाते हैं। हीरोडोट्स उन्हें यूनानियों के बीच सबसे अधिक सक्षम दार्शनिक मानते हैं।
30. आनुवंशिकी के जनक – ग्रेगर मेंडेल
आनुवंशिकी या जेनेटिक्स जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत आनुवंशिकता (हेरेडिटी) तथा जीवों की विभिन्नताओं (वैरिएशन) का अध्ययन किया जाता है। इसे समान से समान की उत्पति (लाइक बिगेट्स लाइक) का सिद्धान्त कहते हैं। आनुवंशिकता के अध्ययन में ग्रेगर जॉन मेंडेल की मूलभूत उपलब्धियों को आजकल आनुवंशिकी के अंतर्गत समाहित कर लिया गया है।
ग्रेगर जॉन मेंडल एक जर्मन भाषी ऑस्ट्रियाई औगस्टेनियन वैज्ञानिक थे। उन्हें आनुवांशिकी का जनक कहा जाता है। उन्होंने मटर के दानों पर प्रयोग कर आनुवांशिकी के नियम निर्धारित किए थे। उनके कार्यों की महत्ता बीसवीं शताब्दी तक नहीं पहचानी गई बाद में उन नियमों की पुनर्खोज ने उनका महत्व बताया और उन्हें इस क्षेत्र के जनक के रूप में जाने लगे।
31. इंटरनेट के जनक – विंट सेर्फ़
विंट सेर्फ़ अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक एक अमेरिकी इंटरनेट अग्रणी है और उन्हें ” इंटरनेट के पिता ” में से एक के रूप में पहचाना जाता है, उन्हें मानद उपाधियाँ और पुरस्कार मिले हैं जिनमें नेशनल मेडल ऑफ़ टेक्नोलॉजी ट्यूरिंग पुरस्कार , प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ़ फ्रीडम, मार्कोनी पुरस्कार और नेशनल एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग में सदस्यताएँ भी शामिल हैं।
️32. वनस्पति विज्ञान के जनक – थियोफ्रेस्टस
विभिन्न क्षेत्रों के जनक में थियोफ्रेस्ट्स को वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान के कारण उन्हें वनस्पति विज्ञान के जनक कहे जाते है।
33. बिजली के जनक – बेंजामिन फ्रैंकलिन
बेंजामिन फ्रैंकलिन संयुक्त राज्य अमेरिका के संस्थापक जनकों में से एक थे। एक प्रसिद्ध बहुश्रुत, फ्रैंकलिन एक प्रमुख लेखक और मुद्रक, व्यंग्यकार, राजनीतिक विचारक, राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, आविष्कारक, नागरिक कार्यकर्ता, राजमर्मज्ञ, सैनिक, और राजनयिक थे। एक वैज्ञानिक के रूप में, बिजली के सम्बन्ध में अपनी खोजों और सिद्धांतों के लिए वे प्रबोधन और भौतिक विज्ञान के इतिहास में एक प्रमुख शख्सियत रहे।
उन्होंने बिजली की छड़, बाईफोकल्स, फ्रैंकलिन स्टोव, एक गाड़ी के ओडोमीटर और ग्लास आर्मोनिका का आविष्कार किया। उन्होंने अमेरिका में पहला सार्वजनिक ऋण पुस्तकालय और पेंसिल्वेनिया में पहले अग्नि विभाग की स्थापना की। वे औपनिवेशिक एकता के शीघ्र प्रस्तावक थे और एक लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में, उन्होंने एक अमेरिकी राष्ट्र के विचार का समर्थन किया।
️34. इलेक्ट्रॉनिक्स के जनक – माइकल फैराडे
माइकेल फैराडे, भौतिक विज्ञानी एवं रसायनज्ञ थे। उन्होने विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव का आविष्कार किया। उसने विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का अध्ययन करके उसको नियमवद्ध किया। इससे डायनेमों तथा विद्युत मोटर का निर्माण हुआ। बाद में मैक्सवेल के विद्युतचुम्बकत्व के चार समीकरणों में फैराडे का यह नियम भी सम्मिलित हुआ। फैराडे ने विद्युत रसायन पर भी बहुत काम किया और इससे सम्बन्धित अपने दो नियम दिये। उन्होंने रुडोल्फ डिजल के साथ डिजल – चलित बिजली उत्पादक का आविष्कार किया था।
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35. टेलीविजन के जनक – फिलो फार्नवर्थ
फिलो टेलर फ़ार्नस्वर्थ एक अमेरिकी आविष्कारक और टेलीविजन अग्रणी थे। उन्होंने सभी इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन के शुरुआती विकास में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। वह 1927 में अपने पहले पूरी तरह कार्यात्मक ऑल – इलेक्ट्रॉनिक इमेज पिकअप डिवाइस इमेज डिसेक्टर के आविष्कार के साथ – साथ पहले पूरी तरह कार्यात्मक और पूर्ण ऑल – इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन सिस्टम के लिए जाने जाते हैं।
फार्नवर्थ ने रिसीवर और कैमरे के साथ एक टेलीविजन प्रणाली विकसित की- जिसे उन्होंने 1938 से 1951 तक फार्नवर्थ टेलीविजन और रेडियो निगम के माध्यम से व्यावसायिक रूप से तैयार किया।
36. परमाणु रसायन विज्ञान के जनक – ओटो हैन
जर्मन पेट्रोलॉजिस्ट एक जर्मन रसायनज्ञ थे, जो रेडियोधर्मिता और रेडियोकैमिस्ट्री के क्षेत्र में अग्रणी थे। उन्हें “परमाणु रसायन विज्ञान के पिता और परमाणु विखंडन के पिता ” के रूप में जाना जाता है। हैन और लिसे मीटनर ने रेडियम, थोरियम, प्रोटैक्टीनियम और यूरेनियम के रेडियोधर्मी समस्थानिकों की खोज की। उन्होंने परमाणु पुनरावृत्ति और परमाणु समरूपता की घटनाओं की भी खोज की, और रूबिडियम स्ट्रोंटियम डेटिंग का बीड़ा उठाया। 1938 में, हैन, लिसे मीटनर और फ्रिट्ज स्ट्रैसमैन ने परमाणु विखंडन की खोज की, जिसके लिए हैन को रसायन विज्ञान के लिए 1944 का नोबेल पुरस्कार मिला। परमाणु रिएक्टर और परमाणु हथियारों का आधार परमाणु विखंडन था।
37. आवर्त सारणी के जनक – दिमित्री मेंडेलीव
डेमीत्रि इवानोविच मेडेलीफ़, एक रूसी रसानज्ञ और आविष्कारक थे। उन्होंने तत्वों के आवर्त वर्गीकरण का प्रतिपादन किया। इस सारणी का प्रयोग कर उन्होंने उन तत्वों के गुणों का भी पता लगाया, मेंडेलीफ़ का अमर कार्य तत्वों आवर्त नियम और आवर्त सारणी संबंधी है। तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण परमाणु भारों के आवर्त फलन हैं- यह नियम लगभग एक ही समय जर्मनी में लोथर मेयर और रूस में मेंडेलीफ़ ने प्रतिपादित किया। मेंडेलीफ़ ने तत्वों की जो आवर्त सारणी प्रस्तुत की, उसमें अब काफी सुधार हो गए हैं, पर यह सारणी आज तक रसायन विज्ञान का पथ प्रदर्शन कर रही हैं। इस आवर्त सारणी के आधार पर मेंडेंलीफ़ ने कुछ ऐसे तत्वों के अस्तित्व की घोषणा की थी, जिनका उसके समय में पता न था और बाद को जब ये तत्व खोज निकाले गए तो इनके गुण वही मिले जिनकी भविष्यवाणी ने पहले ही कर रखी थी।
️38. ज्यामिति के जनक – यूक्लिड
यूक्लिड प्राचीन यूनान का एक गणितज्ञ था। उसे ज्यामिति का जनक कहा जाता है। उसकी एलिमेंट्स नामक पुस्तक गणित के इतिहास में सफलतम् पुस्तक है। इस पुस्तक में कुछ गिने – चुने स्वयंसिद्धों के आधार पर ज्यामिति के बहुत से सिद्धान्त निष्पादित किये गये हैं। इनके नाम पर ही इस तरह की ज्यामिति का नाम यूक्लिडीय ज्यामिति पड़ा। हजारों वर्षों बाद भी गणितीय प्रमेयों को सिद्ध करने की यूक्लिड की विधि सम्पूर्ण गणित का रीढ़ बनी हुई हैं।
️39. आयुर्वेद के जनक – धन्वंतरि
धन्वंतरि आयुर्वेद जगत के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। आदिकाल में आयुर्वेद की उत्पत्ति ब्रह्मा से ही मानते हैं। आदि काल के ग्रंथों में रामायण – महाभारत तथा विविध पुराणों की रच हुई है, जिसमें सभी ग्रंथों ने आयुर्वेदावतरण के प्रसंग में भगवान धन्वंतरि का उल्लेख किया है। इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी।
40. आधुनिक चिकित्सा के जनक – हिप्पोक्रेट्स
हिपोक्रेटिस, प्राचीन यूनान के एक प्रमुख विद्वान थे। ये यूनान के पाश्चात्य चिकित्सा शास्त्र के जन्म दाता थे। इनका जन्म 470 – 370 ई. पूर्व माना जाता है। इनका जन्म प्राचीन यूनान के शहर कोस में हुवा। और मृत्यु शहर लारिस्सा में हुई। ऐसा माना जाता है, कि इन्होने मानव रोगों पर प्रथम ग्रन्थ लिखा। इन्हे आधुनिक चिकीत्सा शास्त्र का जनक कहते है।
41. कंप्यूटर के जनक – चार्ल्स बैबेज
चार्ल्स बैबेज एक अंग्रेजी बहुश्रुत था। एक गतज्ञ, दार्शनिक, आविष्कारक और यांत्रिक इंजीनियर बैबेज ने एक डिजिटल प्रोग्रामयोग्य कंप्यूटर की अवधारणा की शुरुआत की, बैबेज को “कंप्यूटर का जनक” मानते हैं। बैबेज को पहले मैकेनिकल कंप्यूटर, डिफरेंस इंजन का आविष्कार करने का श्रेय दिया जाता है, जिसने अंततः अधिक जटिल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइनों को जन्म दिया, हालांकि आधुनिक कंप्यूटर के सभी अन्य क्षेत्रों में उनके विविध कार्यों ने उन्हें अपनी सदी के कई बहुश्रुतियों में “प्रसिद्ध” के रूप में वर्णित किया है।
बैबेज, जिनकी मृत्यु उनके डिफरेंस इंजन और एनालिटिकल इंजन सहित उनके कई डिजाइनों की पूर्ण सफल इंजीनियरिंग से पहले हो गई थी, कंप्यूटिंग के विचार में एक प्रमुख व्यक्ति बने रहे। बैबेज के अधूरे तंत्र के कुछ हिस्सों को लंदन के साइंस म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है। 1991 में, बैबेज की मूल योजनाओं से एक कार्यशील अंतर इंजन का निर्माण किया गया था। 19वीं शताब्दी में प्राप्त सहिष्णुता के लिए निर्मित, तैयार इंजन की सफलता ने संकेत दिया कि बैबेज की मशीन ने काम किया होग
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️42. खगोल विज्ञान के जनक – कॉपरनिकस
पोलैंड में जन्में निकोलस कोपरनिकस पोलिश खगोलशास्त्री व गणितज्ञ थे। उन्होंने यह क्रांतिकारी सूत्र दिया था कि पृथ्वी अंतरिक्ष के केन्द्र में नहीं है। निकोलस पहले युरोपिय खगोलशास्त्री थे जिन्होंने पृथ्वी को ब्रह्माण्ड के केन्द्र से बाहर माना, यानी हीलियोसेंट्रिज्म मॉडल को लागू किया। इसके पहले पूरा युरोप अरस्तू की अवधारणा पर विश्वास करता था, जिसमें पृथ्वी ब्रह्माण्ड का केन्द्र थी और सूर्ये, तारे तथा दूसरे पिंड उसके गिर्द चक्कर लगाते थे।
1530 में कोपरनिकस की किताब प्रकाशित हुई जिसमें उसने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती हुई एक दिन में चक्कर पूरा करती है और एक साल में सूर्य का चक्कर पूरा करती है। कोपरनिकस ने तारों की स्थिति ज्ञात करने के लिए प्रूटेनिक टेबिल्स की रचना की जो अन्य खगोलविदों के बीच काफी लोकप्रिय हुई।
️43. अर्थशास्त्र के जनक – एडम स्मिथ
एडम स्मिथ एक ब्रिटिश नीतिवेत्ता, दार्शनिक और राजनैतिक अर्थशास्त्री थे। उन्हें अर्थशास्त्र का पितामह कहा जाता है। आधुनिक अर्थशास्त्र के निर्माताओं में एडम स्मिथ का नाम सबसे पहले आता है। उनकी पुस्तक राष्ट्रों की संपदा ने अठारहवीं शताब्दी के इतिहासकारों एवं अर्थशास्त्रियों को बेहद प्रभावित किया है।
44.जीव विज्ञान के जनक – अरस्तू
अरस्तू को जीव विज्ञान के जनक कहा जाता है जिन्होंने सर्वप्रथम पौधों एवं जन्तुओ के जीवन के विभिन्न पक्षों के विषय में दुनिया के बीच अपने विचार प्रकट किये थे। इसके अलावा उन्हें जीवविज्ञान की शाखा” प्राणी विज्ञान का जनक भी कहते हैं। वे प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु भी थे। क्षेत्र जीव विज्ञान, भौतिकी, कविता, नाटक, संगीत, आध्यात्म, तर्कशास्त्र, नीतिशास्त्र, राजनीति शास्त्र चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में, अरस्तू ने वन्यजीवों से भरे लेसवोस की यात्रा की, उन्होनें वहां जो पाया और देखा उसके बदौलत विज्ञान के एक नई शाखा का जन्म हुआ।
अरस्तू को जीवविज्ञान के पिता इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने व्यापक रूप से प्राकृतिक दुनिया का अध्ययन किया था और इसकी उत्पत्ति को दिव्य हस्तक्षेप से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि और व्यवस्थित टिप्पणियों का उपयोग करके जांच की थी। वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने जानवरों के बीच संबंध को उजागर करने और वर्गीकरण की एक प्रणाली स्थापित की थी।
️45.इतिहास के पिता – हेरोडोटस
हिरोडोटस यूनानी यूनान के इतिहासकार एवं भूगोलवेत्ता थे। उन्होंने अपने इतिहास का विषय पेलोपोनेसियन युद्ध को बनाया था। उनके द्वारा लिखित पुस्तक हिस्टोरिका थी। हेरोडोटस को “इतिहास का पिता “इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम अपने ग्रंथ को हिस्टोरिका में हिस्ट्री के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने इतिहास को पृथक विषय के रूप में स्थापित किया और इसे वैज्ञानिक विद्या, मानवीय क्रियाकलापों का अंकन मानवीय विद्या, आलोचनात्मक विद्या, तर्कसंगत, आदि बतलाया है।
️46. होम्योपैथी के जनक – हेनेमैन
क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान छद्म – वैज्ञानिक “होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति” के जन्मदाता थे।
आप यूरोप के देश जर्मनी के निवासी थे। आपके पिता जी एक पोर्सिलीन पेन्टर थे और आपने अपना बचपन अभावों और बहुत गरीबी में बिताया था। एम .डी . डिग्री प्राप्त एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान के ज्ञाता थे डॉ. हैनिमैन, एलोपैथी के चिकित्सक होनें के साथ साथ कई यूरोपियन भाषाओं के ज्ञाता थे। वे केमिस्ट्री और रसायन विज्ञान के निष्णात थे।
️47. रक्त समूहों के जनक – लैंडस्टीनर
रक्त समूह के जनक कार्ल लैंडस्टीनर, जो एक ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी, चिकित्सक और प्रतिरक्षाविज्ञानी थे। उन्होंने 1900 में मुख्य रक्त समूहों को प्रतिष्ठित किया, रक्त में एग्लूटीनिन की उपस्थिति की पहचान से रक्त समूहों के वर्गीकरण की आधुनिक प्रणाली विकसित की।
1937 में, अलेक्जेंडर एस वीनर, रीसस कारक के साथ पहचान की इस प्रकार चिकित्सकों को रोगी के जीवन को खतरे में डाले बिना रक्त आधान करने में सक्षम बनाना। साथकॉन्स्टेंटिन लेवादिति और इरविन पॉपर, उन्होंने 1909 में पोलियो वायरस की खोज की। उन्हें 1926 में एरोनसन पुरस्कार मिला। 1930 में, उन्हें फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला। उन्हें 1946 में मरणोपरांत लस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, और उन्हें आधान चिकित्सा के पिता के रूप में वर्णित किया गया है।
48. रक्त परिसंचरण के जनक – विलियम हार्वे
विलियम हार्वे एक अंग्रेजी चिकित्सक थे जिन्होंने शरीर रचना विज्ञान और शरीर विज्ञान में प्रभावशाली योगदान दिया। वह पहले ज्ञात चिकित्सक थे जिन्होंने पूरी तरह से वर्णन किया, और विस्तार से, रक्त के प्रणालीगत परिसंचरण और गुणों को मस्तिष्क और शेष शरीर में हृदय द्वारा पंप किया जा रहा था, हालांकि पहले के लेखक, जैसे कि रियलडो कोलंबो, माइकल सर्वेटस, और जैक्स डुबोइस, ने सिद्धांत के अग्रदूत प्रदान किए थे।
️49.जीवाणु विज्ञान के जनक – लुई पास्टर
लुई पास्तर एक फ्रांसीसी रसायनशास्त्र वैज्ञानिक और सूक्ष्म – जैवविज्ञानी थे जो टीकाकरण, किण्वन और पास्तरीकरण के सिद्धान्तों की अपनी खोजों के लिए प्रसिद्ध थे। रसायन विज्ञान में उनके शोध ने रोगों के कारणों और निवारण की समझ में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, जिन्होंने स्वच्छता, जनस्वास्थ्य और आधुनिक चिकित्सा की नींव रखी।
उनके कार्यों को रेबीज़ और ऐंथ्राक्स के टीकों के विकास के माध्यम से लाखों लोगों की जीवन बचाने का श्रेय दिया जाता है। उन्हें आधुनिक जीवाणु विज्ञान के संस्थापकों में से एक माना जाता है और उन्हें जीवाणु विज्ञान के पिता के रूप में और सूक्ष्म जीव विज्ञान के पिता के रूप में सम्मानित किया गया है।
50. भूगोल के जनक – जेम्स रेनेल
मेजर जेम्स रेनेल, एक अंग्रेजी भूगोलवेत्ता, इतिहासकार और समुद्र विज्ञान के अग्रणी थे। रेनेल ने एक इंच से पांच मील की दूरी पर बंगाल के कुछ पहले सटीक मानचित्रों के साथ – साथ भारत की सटीक रूपरेखा तैयार की और बंगाल के सर्वेयर जनरल के रूप में कार्य किया। 1830 में वह लंदन में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी के संस्थापकों में से एक थे।
रेनेल का पहला और सबसे प्रभावशाली कार्य था बंगाल एटलस (1779) जो भारत के पहले विस्तृत नक्शे के बाद किया गया, की भौगोलिक प्रणाली हेरोडोटस (1800), पश्चिमी का तुलनात्मक भूगोल एशिया (1831), और उत्तरी अफ्रीका के भूगोल पर महत्वपूर्ण अध्ययन – मुंगो पार्क और हॉर्नमैन की यात्रा के परिचय में स्पष्ट। रेनेल ने मेमोयर ऑफ ए मैप ऑफ हिंदोस्तान (1788) नामक पुस्तक प्रकाशित की और सर जोसेफ बैंक्स को समर्पित की। भूगोल के क्षेत्र में उनके इन उपलब्धियों के कारण उन्हें भूगोल का जनक कहा जाता हैं।
तो ये था विभिन्न क्षेत्रों के जनक कौन कौन है और उन्हें जनक क्यों कहा जाता हैं? उम्मीद हैं कि आपको इससे कुछ हेल्प मिला होगा।